प्रथम विश्व युद्ध के शुरुवात की एक शताब्दी पूर्ण
- अनिल वर्मा
यह सर्वविदित है कि प्रथम और द्वितीय दोनों विश्वयुद्ध में दुनिया के विनाश की ऐसी भयावह तस्वीरे सामने आई थी, कि मानवता काँप उठी थी। अब प्रथम विश्वयुद्ध को १०० वर्ष पूर्ण हो रहे है , इस शताब्दी वर्ष में प्रथम विश्वयुद्ध पर आपके लिए मै लगातार रोचक जानकारी प्रस्तुत करुँगा और हर दो दिनों में एक नया पोस्ट आपके सामने होगा।
आज के ही दिन ठीक 100 साल पहले 28 जून सन 1914 को प्रथम विश्व युद्ध की पहली चिंगारी भड़की थी, तब इसका तात्कालिक कारण बोस्निया की राजधानी सर्बिया में 28 जून 1914 में ऑस्ट्रिया के ताज के उत्तराधिकारी आर्कडयूक आर्चफ्राज फर्डिनैंड और उनकी पत्नी सोफी की सर्ब राष्ट्रवादी गैवरिलो प्रिंसिप द्वारा गोली मारकर हत्या करा देना था , इस कायरतापूर्ण घटना के बाद गुस्साए ऑस्ट्रिया ने बोस्निया पर भीषण हमला कर दिया। ऑस्ट्रिया और हंगरी ने सर्बिया को चेतावनी जारी देते हुए युद्ध का ऎलान कर दिया , पहले से ही दो गुटों में बंटी दुनिया एक-दूसरे के पाले में आती गई और यह विश्वयुद्ध का विकराल रूप लेता चला गया। प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत 28 जुलाई, 1914 को हुई थी और यह 11 नवंबर, 1918 तक चला। यह युद्ध इतना भीषण हुआ कि इसकी चपेट में पूरे यूरोपीय देश और उनके उपनिवेश तक आ गए। यह युद्ध जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों में लड़ा गया था और इसमें करीब 90 लाख से अधिक लोग मारे गए थे।
इस महायुद्ध में करीब 70 हजार भारतीय सैनिकों ने अपनी जिंदगी की
कुर्बानी देकर ब्रिटेन को ऐतिहासिक जीत का तोहफा दिया था। अंग्रेज सरकार ने सन 1931 में नई
दिल्ली में इंडिया गेट स्मारक का निर्माण करवाकर प्रथम विश्व
युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गए भारतीय सैनिकों के प्रति श्रद्धांजलि प्रगट
की थी ।
- अनिल वर्मा
( मोब. न. - 09425181793)
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